ना हम सुधरेंगे, ना शहर को सुधरने देंगे” – सुभाष चौक/शहर बना अतिक्रमण का अड्डा, प्रशासन मौन
चित्तौड़ शहर में ऑटो, हाथ ठेलों और दुकानदारों का अतिक्रमण

“ना हम सुधरेंगे, ना शहर को सुधरने देंगे” – सुभाष चौक/शहर बना अतिक्रमण का अड्डा, प्रशासन मौन
ऑटो चालकों का आतंक, हाथ ठेलों का कब्जा और दुकानदारों के टेंट ने सुंदर शहर को बनाया बदसूरत, आमजन परेशान
चित्तौड़गढ़, छोटा शहर, सुंदर शहर…यही पहचान है चित्तौड़गढ़ की। लेकिन शहर के हृदय स्थल सुभाष चौक की तस्वीर देखकर इस पहचान पर खुद ही सवाल खड़ा हो जाता है। हालात ये हैं कि जिम्मेदारों की अनदेखी और कुछ लोगों की मनमानी ने शहर के सबसे व्यस्त चौराहे को अव्यवस्था के चौराहे में बदल दिया है।

सुभाष चौक पर दिनभर का नजारा एक ही है – मेन रोड पर बेतरतीब खड़े ऑटो, जहां-तहां लगे हाथ ठेले और सड़क तक टेंट लगाकर बैठे दुकानदार। ऑटो वालों ने तो जैसे सड़क को अपना निजी स्टैंड बना रखा है। सवारी के इंतजार में मेन रोड पर ही ऑटो तिरछा लगाकर खड़ा कर देना, बिना इंडिकेटर के अचानक मोड़ देना इनकी फितरत बन गई है। पीछे से आ रहे राहगीर, एंबुलेंस और स्कूली बच्चों को कितनी परेशानी होती है, इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।
इसमें हाथ ठेला संचालक भी पीछे नहीं हैं। मनचाही जगह ठेला लगाकर अतिक्रमण करना, ग्राहकों की भीड़ से रास्ता जाम कर देना आम बात हो गई है। तो वहीं कुछ दुकानदारों ने दुकान से बाहर 10 फीट तक टेंट और सामान लगाकर फुटपाथ और सड़क दोनों पर कब्जा कर लिया है। नतीजा – सुंदर शहर की सूरत बिगड़ रही है और जाम के झाम से आमजन जूझ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार नगर परिषद और यातायात पुलिस से शिकायत की, लेकिन कार्रवाई सिर्फ कागजों में होती है। एक-दो दिन अतिक्रमण हटता है और तीसरे दिन फिर वही हाल। सवाल ये है कि जब शहर छोटा है तो संभाला क्यों नहीं जा रहा? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

समय आ गया है कि प्रशासन सुभाष चौक को ऑटो-मुक्त, ठेला-मुक्त करने के लिए ठोस कार्रवाई करे, तय ऑटो स्टैंड बनाए और अतिक्रमण करने वालों पर जुर्माना लगाए, नहीं तो “स्मार्ट सिटी” का सपना सिर्फ नारों तक ही सीमित रह जाएगा।




