
गांव की सरकार के लिए बिगुल बजा: चित्तौड़गढ़ में दो चरणों में होगा रण, 9.73 लाख वोटर तय करेंगे किसकी होगी प्रधानगी, 5 जगह महिला राज
चित्तौड़गढ़ जिले में लोकतंत्र के सबसे बड़े गांव-स्तरीय महापर्व का काउंटडाउन शुरू हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग के ऐलान के साथ ही चित्तौड़गढ़ में आचार संहिता का सायरन बज चुका है। अब गांव की चौपाल से लेकर पंचायत भवन तक सिर्फ एक ही चर्चा है – कौन बनेगा गांव का सरपंच और किसके सिर सजेगा प्रधान का ताज!
दो चरणों में होगा चित्तौड़गढ़ का चुनावी घमासान, प्रशासन ने इस बार जिले को दो हिस्सों में बांटा है।
पहला घमासान (तीसरा चरण) – 4 नवंबर को: चित्तौड़गढ़, भदेसर, कपासन, राशमी और भोपालसागर की किस्मत EVM में कैद होगी।
दूसरा घमासान (चौथा चरण) – 14 नवंबर को: बेगूं, भैंसरोडगढ़, गंगरार, निंबाहेड़ा, डूंगला और बड़ीसादड़ी में वोटिंग होगी।
धनतेरस पर गांव में वोटों की बरसात!
सबसे दिलचस्प बात – गांव के सबसे बड़े पद सरपंच और वार्ड पंच के लिए वोटिंग धनतेरस के दिन होगी।
6 नवंबर (धनतेरस) को – चित्तौड़गढ़, भदेसर, कपासन, राशमी, भोपालसागर में
16 नवंबर को – बाकी 6 पंचायत समितियों में
इसी दिन शाम को ही मतपेटी खुल जाएगी और पता चल जाएगा कि गांव का नया मुखिया कौन है। उपसरपंच का चुनाव अगले ही दिन 7 और 17 नवंबर को होगा।
35 जिला परिषद, 199 पंचायत समिति और 359 सरपंच… 9.73 लाख मतदाता बनेंगे भाग्य विधाता
इस चुनाव में जिले के 9.73 लाख मतदाता अपनी सरकार चुनेंगे।
कुल पद: 35 जिला परिषद सदस्य, 11 प्रधान, 199 पंचायत समिति सदस्य, 359 सरपंच और 3159 वार्ड पंच।
जिला प्रमुख और प्रधान का चुनाव बाद में निर्वाचित सदस्य करेंगे।
– जिला परिषद/पंचायत समिति की गिनती – 20 नवंबर सुबह 8 बजे से
– जिला प्रमुख – 25 नवंबर
– उप जिला प्रमुख – 26 नवंबर
– प्रधान – 27 नवंबर
– उप प्रधान – 28 नवंबर
महिला शक्ति का परचम: 5 जगह महिला प्रधान तय!
आरक्षण की लॉटरी ने इस बार महिलाओं की बल्ले-बल्ले कर दी है। जिले में जिला प्रमुख का पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित है।
11 में से 5 पंचायत समितियों पर महिला प्रधान बनना तय है:
– गंगरार – SC महिला
– राशमी – ST महिला
– निंबाहेड़ा, भैंसरोडगढ़, बड़ीसादड़ी – सामान्य महिला
EVM या बैलेट? कन्फ्यूजन खत्म!
सरपंच और वार्ड पंच का चुनाव पुरानी परंपरा से – बैलेट पेपर (मतपेटी) से होगा।
और जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्य का चुनाव – ECIL की नई MPMV EVM मशीन से।
आचार संहिता लगते ही तबादलों और नई घोषणाओं पर ब्रेक लग गया है। अब गांव-गांव में सिर्फ चुनावी चर्चा है।




