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‘पान का बीड़ा, काला चश्मा’……..और क्रॉस वोटिंग का डर 

‘पान का बीड़ा, काला चश्मा’……..और क्रॉस वोटिंग का डर 

मुकेश्या नंद महाराज….एक बेबाक राजनीतिक व्यंग्य # 15— आकाश शर्मा

चित्तौड़गढ़, राजस्थान। नगर निकाय चुनाव के नतीजों के बाद शहर की फिजाओं में एक अजीब सी खामोशी छाई हुई है। किसी से भी चुनाव या उपसभापति पद पर चर्चा करो, तो सीधा सा जवाब मिलता है “नो कमेंट्स !” यानी दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है । लेकिन राजनीति के गलियारों में सुगबुगाहट रुकने का नाम नहीं ले रही। खासकर चंदेरिया से उठी मांग ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। आखिर बात भी जायज है बरसों बाद वहां कमल खिला है, तो आम कार्यकर्ताओं और नागरिकों की यह इच्छा स्वाभाविक ही है कि उनके क्षेत्र से किसी युवा प्रतिनिधि को मौका मिले। इसी उम्मीद के साथ क्षेत्रवासियों ने सांसद चंद्रप्रकाश जोशी और विधायक चंद्रभान आक्या से उनके आवास पर मुलाकात कर अपनी बात पुरजोर तरीके से रख दी है।

मुकेश्या नंद महाराज और सियासी दर्शन

इन तमाम कसमसाहटों के बीच, जब हवाओं ने हमें भी अपनी चपेट में ले लिया (बुखार वाला वायरल, सियासी नहीं !), तो कलम उठाने की हिम्मत जुटाई । हालांकि, शरीर साथ नहीं दे रहा था, इसलिए तुरंत स्मरण करना पड़ा हमारे अपने बाबाजी मुकेश्या नंद महाराज का, बुलाते ही बाबाजी प्रकट हुए और बोले “बोलों वत्स, किस दुविधा में फंसे हो ?” हमने झिझकते हुए पूछा, “बाबाजी, बस इतना बता दीजिए कि क्या इस बार भी किसी के साथ ‘खेला’ होने वाला है ?”

बाबाजी ने मुस्कुराते हुए अपनी माला फेरी और कहा”वत्स! यह राजनीति है । यहां ‘तेरा-मेरा’ करने का कोई सवाल ही नहीं होता । व्यक्तिगत कुछ नहीं होता, ‘पार्टी’ है तो सब कुछ है ।” हमने भी अड़ते हुए कहा, “बाबाजी, बात तो सही है, लेकिन जिन कार्यकर्ताओं के खून-पसीने और दम पर पार्टी मजबूत हुई है, उनका मान-सम्मान भी तो जरूरी है ?”

बाबाजी ने थोड़ा गंभीर होते हुए समझाया…..”बेटा, सबसे पहले पार्टी !……….कमल का फूल कब, किसे अपने माथे पर सुशोभित कर ले, यह अभी भविष्य के गर्भ में है। हां, इतना जरूर है कि क्षेत्रवासियों की बातों ने नेताओं के दिलों पर असर तो गहरा छोड़ा है। जब दिल से आवाज निकलती है, तो बाकी सारी आवाजें ठंडी पड़ जाती हैं… यह हमेशा याद रखना। ॐ नमो नारायण।”

अब आगे क्या ?....

पान के बीड़े की मनुहार के बीच, क्रॉस वोटिंग का डर पार्टी के भीतर मंडरा रहा है । आलाकमान किसे आगे बढ़ाएगा और कौन बाजी मार ले जाएगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

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